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जानें क्या है अनुच्छेद 370, अब क्या बदल गया

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जम्मू और कश्मीर में जारी गहमागहमी और सैन्य हलचल के बीच घाटी से दिल्ली तक बनी असमंजस की स्थिति आज खत्म हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 के सभी खंड को नहीं लागू करने का संकल्प पेश किया। अनुच्छेद 370 में अब सिर्फ खंड 1 रहेगा। आइए जानते हैं कि आखिर अनुच्छेद 370 हैं क्या और इस पर विवाद क्यों हो रहा है।

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है। इसके अनुसार भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है। इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती है।

गोपालस्वामी आयंगर ने धारा 306-ए का प्रारूप पेश किया था। बाद में यह धारा 370 बनी। इन अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिले। 1951 में राज्य को संविधान सभा अलग से बुलाने की अनुमति दी गई। नवंबर 1956 में राज्य के संविधान का कार्य पूरा हुआ। 26 जनवरी 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया।

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धारा 370 की बड़ी बातें-

-जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते थे।

-विधानसभा का कार्यकाल 6 साल होता था।

-भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में बहुत ही सीमित दायरे में कानून बना सकती थी।

-महिलाओं पर शरियत कानून लागू होता था।

-कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी।

-यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती थी, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी।

-पंचायत के पास जम्मू-कश्मीर में कोई अधिकार नहीं था।

-काम करने वाले चपरासी को आज भी जम्मू-कश्मीर में ढाई हजार रूपये ही बतौर वेतन मिल रहे थे।

-कश्मीर में अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता था।

-जम्मू-कश्मीर का झंडा अलग होता था।

-वहां के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी।

– भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान जम्मू-कश्मीर में अपराध नहीं था। यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश मान्य नहीं होते थे।

-धारा 370 के चलते कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती थी।

-सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू नहीं होता था।

-शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू नहीं होता था। यहां सीएजी भी लागू नहीं था।

अब हुआ ये बदलाव-

-जम्मू-कश्मीर अब राज्य नहीं रहेगा।

-जम्मू-कश्मीर की जगह अब दो केंद्र शासित प्रदेश होंगे।

-एक का ना होगा जम्मू-कश्मीर, दूसरे का नाम होगा लद्दाख।

-दोनों केंद्र शासित प्रदेशों का शासन लेफ़्टिनेंट गवर्नर के हाथ में होगा।

-जम्मू-कश्मीर की विधायिका होगी जबकि लद्दाख में कोई विधायिका नहीं होगी।

-अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के आदेश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

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