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बेगम अख्तर बर्थडे: जिन्हें कहा गया मल्लिका-ए-गजल

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संगीत जगत में बेगम अख्तर का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है. उन्हें अपनी गायकी के लिए मल्लिका-ए-गजल कहा जाता था. साथ ही संगीत से ताउम्र उनका गहरा लगाव रहा है. वहीं इतना ही नहीं मरते दम तक उन्होंने गाना नहीं छोड़ा. बता दें कि उन्होंने गाना गाने,कंपोज करने के अलावा फिल्मों में एक्टिंग भी की. महान सिंगर के जन्मदिन के मौके पर बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ किस्से.

वहीं बेगम अख्तर का जन्म 7 अक्टूबर, 1914 को यूपी के फैजाबाद में हुआ था. पहले उनका नाम अख्तरीबाई फैजाबादी हुआ करता था. वे गजल, ठुमरी और दादरा गाती थीं. इन्होंने 15 साल की उम्र में बेगम अख्तर ने अपनी पहली स्टेज परफॉर्मेस दी थी. साथ ही इस दौरान सरोजनी नायडू ने भी उनके गाने की प्रशंसा की थी. पर्सनल लाइफ की तरफ रुख करें तो उन्होंने साल 1945 को इस्तियाक अहमद अब्बासी से शादी कर ली और अपना नाम बेगम अख्तर रखा.

पति ने लगाई गाना गाने से रोक

वहीं शादी के बाद बेगम अख्तर को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा. बता दें कि उनकी पति ने बेगम अख्तर के गाने पर रोक लगा दी. जिसके बाद वो 5 साल तक वह गाना नहीं गा पाई. इसके बावजूद उनका संगीत से हमेशा बहुत गहरा रिश्ता रहा. करियर के अंतिम दिनों में जब वे बीमार चल रही थीं तो डॉक्टर्स ने भी उन्हें गाने से मना कर दिया था. मगर इसके बाद भी उन्होंने परफॉर्मेंस दी. लेकिन अफसोस अहमदाबाद का कंसर्ट उनके जीवन का आखिरी कंसर्ट साबित हुआ. गुजरात के अहमदाबाद में परफॉर्म करने गईं बेगम अख्तर का कंसर्ट के कुछ समय बाद ही निधन हो गया. वहीं 30 अक्टूबर 1974 को 60 साल की उम्र में निधन हो गया.

खुद कंपोज करती थी अपने गाने

बेगम अख्तर, गालिब, फैज अहमद फैज, जिगर मुरादाबादी, शकील बदायुनी और कैफी आजमी की लेखनी से काफी प्रभावित थीं. वे अधिकतर समय तो अपने गाने खुद कंपोज करती थीं और क्लासिकल राग पर बनाती थीं. उन्हें कला के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा संगीत नाटक अकादमी, पद्मश्री और पद्म भूषण जैसे सम्मान से नवाजा गया.

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